गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का योग आ रहा है 149 साल के बाद

भोपाल। मंगलवार-बुधवार की रात को हो रहे चंद्रग्रहण के दौरान सावधानी और कुछ जरुरी उपाय कर लेंगे तो ग्रहण के दुष्प्रभाव काफी हद तक टल जाएंगे। कई पंडितों-ज्योतिषियों का कहना है कि चंद्रग्रहण काफी नुकसान दायक हो सकता है। वैसे ये भी सच है कि यदि इस दौरान सावधानी बरतें,कुछ उपाय करें तो बड़े अनिष्ट को टालने में मदद मिल सकती है। वैसे गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का योग 149 साल बाद आ रहा है।

चंद्रग्रहण की शुरुआत मंगलवार की रात 1.31 से होकर मोक्ष बुधवार अल सुबह 4.30 पर होगा। इसका सूतक मंगलवार 16 जुलाई को शाम 4.30 बजे से लगेगा। इस दौरान सभी मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। मुख्य मंदिरों में भी शाम की आरती सूतक काल के पहले कर ली जाएगी। इंदौर के खजराना,रणजीत हनुमान,अन्नपूर्णा मंदिर,बिजासन मंदिर आदि के पुजारियों ने भी इसकी तैयारियां कर ली हैं। गुरु पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम गुरु पूजन,पूजा-पाठ आदि भी सूतक काल के पहले कर लिए जाएंगे। कुछ स्थानों पर गुरु पूजन बुधवार को भी होगा।

क्यों पड़ सकते हैं 'यादा बुरे प्रभाव:क्या रहेगी ग्रह स्थिति

गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण 149 साल बाद आ रहा है। 12 जुलाई 1870 को गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हुआ था। ग्रहण के दौरान शनि और केतु चंद्र के साथ धनु राशि में रहेंगे। सूर्य के साथ राहु-शुक्र रहेंगे। सूर्य और चंद्र चार विपरित ग्रह शुक्र,शनि,राहु और केतु के घर में रहेंगे। मंगल नीच का रहेगा। इन ग्रहों की स्थिति से ही ग्रहण को शक्तिशाली माना जा रहा है। ग्रहण के प्रभाव से दुनिया में तनाव ,भूकंपन,बाढ,तूफान एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आशंका जताई जा रही है।

अनिष्ट टालने के लिए करें ये उपाय

हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक किसी भी तरह के बड़े अनिष्ट पूजा-पाठ,मंत्र जाप और दान से टाले जा सकते हैं। ग्रहण के दौरान याद कुछ सावधानियां रखें और मंत्र जाप करें तो संकट टल सकते हैं। वैसे ये ग्रहण उन जातकों के लिए रामबाण बन सकता है जिन पर शनि का प्रभाव चल रहा है। वे ग्रहण के दौरान हनुमान चालीसा,सुंदरकांड,रामायण पाठ करें तो शनि देव प्रसन्न होकर उन्हें कम कष्ट देंगे या कष्ट मुक्त कर देंगे। चंद्रग्रहण के दौरान मंत्र जाप करने से वे सिद्ध हो जाते हैं। अपने इष्ट देव के मंत्र का जाप कर उन्हें जातक सिद्ध कर इष्ट देव की कृपा पा सकते हैं। चंद्र ग्रहण के दौरान ऊँ चंद्राय नम: का जाप बेहद फायदे मंद होता है। स्व'छ आसन पर बैठकर घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप बहुत लाभदायक होता है।

-ग्रहण के दौरान शयन करना या भोजन करना प्रतिबंधित रहता है।

-सूतक काल के पूर्व यदि खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डाल दें तो उन पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता।

-बुजुर्ग या बीमार एवं बच्चे दूध,फल,जूस एवं सात्विक भोजन ले सकते हैं।

-ग्रहण काल के दौरान भोजन नहीं पकाना चाहिए।

-ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्री को बेहद सावधान रहना चाहिए। वे चंद्र ग्रहण के दौरान ऐसे स्थान पर रहें जहां चंद्रमा की किरणें नहीं पड़े। सिलाई -कढाई नहीं करें न ही चाकू से किसी भी वस्तु को काटें या छीलें।

-मंत्र जाप तो कर सकते हैं लेकिन किसी भी प्रतिमा को छूने या पूजा-पाठ नहीं कर सकते।

ग्रहण के बाद मुक्त हस्त से करें दान

ग्रहण का मोक्ष बुधवार सुबह 4.30 पर होगा। ग्रहण समाप्ति के बाद दान करने का बहुत महत्व माना जाता है। इस दौरान अनाज दान,गाय को चारा,गरीबों को वस्त्र आदि दान करें। बालिकाओं को भोजन करवाने के बाद यथा शक्ति दक्षिणा दें। मंदिरों में दूध,चावल एवं सफेद वस्तुओं का दान करने से भी शुभ फल प्राप्त होता है। शिव मंदिरों में अभिषेक का भी विशेष महत्व रहता है। पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। घर में पीने के पानी को बदल लें पूरे घर में गो-मूत्र,गंगाजल मिले जल से पोछा लगाएं। घर के मंदिर में रखी भगवान की प्रतिमाओं को स्नान करवाएं और उसके बाद पूजा पाठ करें। ग्रहण के बाद घी-खीर से हवन करने से भी कई अनिष्ट टल जाते हैं। जिस घर में कोई बीमार हो और कई दिनों से ठीक नहीं हो रहे हों तो इस हवन से वे जल्द ही रोग मुक्त हो सकते हैं।

मन चंगा तो कठौती में गंगा

ग्रहण के बाद पवित्र नदियों या तीर्थ स्थल पर जाकर स्नान करना बेहद पुण्यदायक माना जाता है। यदि किसी कारण वश आप तीर्थ स्थल पर न जा पाएं तो घर पर ही ये उपाय तो कर सकते हैं। एक चांदी का सिक्का,तुलसी के 11 पत्ते लें उन्हें हरे कपड़े में बांध लें। इसे स्नान करने वाले पानी की बाल्टी में डाल दें,गंगा जल की कुछ बूंदे,गौ-मूत्र की कुछ बूंदे डालकर इस पानी से स्नान करें। माना जाता है कि ग्रहण के बाद इस तरह स्नान करने से पवित्र नदियों में स्नान का फल मिलता है। स्नान के बाद तुलसी के पत्तों को गमले में डाल दें और चांदी का सिक्का अपने पास रख लें। कहते हैं मन चंगा तो कठौती में गंगा इस सूत्र वाक्य का मतलब ये है कि यदि आप पवित्र मन से घर पर ही स्नान करें तो गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त हो सकता है।

राशि के मुताबिक दान होगा लाभदायक

पंडितों-जानकारों के मुताबिक यदि राशि के अनुसार आप दान करते हैं तो अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। मेष राशि वाले गुड़ और दाल का दान करें। बृषभ राशि वालों को मंदिर में दही-चीनी का दान लाभ देने वाला रहेगा। मिथुन राशि वाले गौ माता को यथा शक्ति पालक खिलाएं तो उचित रहेगा। कर्क राशि के जातक गरीबों को अनाज-वस्त्र दान करें। सिंह राशि वाले मंदिर में तांबे की वस्तु दान कर सकते हैं। कन्या राशि के जातक कन्या या किन्नर को हरे रंग की चूडिय़ां दान कर राहत पा सकते हैं। तुला राशि के जातक यदि मंदिर में अगरबत्ती का दान करेंगे तो श्रेष्ट रहेगा। वृश्चिक राशि के धारक हनुमान मंदिर में घी का यथा शक्ति दान करेंगे तो ईश्वर कृपा पा सकते हैं। धनु राशि के -पुरुष चने की दाल किसी ब्राह्मण को दान करें अनिष्ट टाल सकते हैं। मकर राशि के जातक गरीबों को काले तिल का दान करेंगे तो उनके लिए लाभदायक रहेगा। कुंभ राशि वाले बहते जल में कोयला दान करें। मीन राशि के धारक बच्चों को केले खिलाकर अतिरिक्त पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।


"To get the latest news update download tha app"