बैंकों में पड़ा है 32000 करोड़ का लावारिस धन

नई दिल्ली। देश के विभिन्न वित्तीय संस्थानों के पास 32000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की रकम लावारिस पड़ी है जिनका कोई दावेदार ​ही नहीं है। यह संपत्ति कैश, बैंक खातों, शेयरों, बीमा के रूप में पड़ी है। या तो लोग इन संपत्तियों को भूल गए हैं या फिर कई लोगों ने पैसे जमा करने शुरू तो किए लेकिन मेच्योरिटी तक निवेश बरकरार नहीं रख पाए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि बैंकों और बीमा कंपनियों में बिना दावे वाली रकम 32455 करोड़ रुपए पहुंच गई है। अनक्लेम्ड जमा राशि के मामले में देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक सबसे आगे है और इसके पास 2156 करोड़ रुपए अनक्लेम्ड जमा राशि के रूप में पड़े हैं। एसबीआई को छोडक़र अन्य सभी राष्ट्रीय बैंकों के पास 9919 करोड़ रुपए, प्राइवेट बैंकों के पास 1851 करोड़ रुपए, विदेशी बैंकों के पास 376 करोड़ रुपए, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पास 271 करोड़ रुपए और स्मॉल फाइनेंस बैंक के पास 2ण्42 करोड़ रुपए अनक्लेम्ड जमा राशि के रूप में पड़े हैं। सीतारमण ने बताया कि बैंकों में अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स को देखते 2014 में आरबीआई ने डीईएएफ स्कीम शुरू की थी। इसके तहत 10 साल या ज्यादा समय से निष्क्रिय पड़े सभी अनक्लेम्ड खातों में जमा राशि या वह रकम जिस पर 10 साल से किसी ने दावा नहीं किया है उसकी ब्याज के साथ गणना कर डीईएएफ में डाल दी जाती है। कोई ग्राहक अगर दावा करता है तो बैंक ब्याज के साथ उसे भुगतान कर देते हैं और फिर डीईएएफ से रिफंड का दावा करते हैं।

पिछले सात 26.8 फीसदी का इजाफा

वित्त मंत्री के अनुसार, बैंकों में अनक्लेम्ड डिपॉजिट में पिछले साल 26.8 फीसदी का इजाफा हुआ है। यह राशि 14578 करोड़ रुपए पहुंच गई। सितंबर 2018 तक लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में बिना दावे वाली राशि 16887.66 करोड़ रुपए जबकि नॉन लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में 989.62 करोड़ रुपए थी। 30 सितंबर 2018 तक बीमा कंपनियों के पास 17877.28 रुपए अनक्लेम्ड जमा राशि के रूप में पड़े हैं। इसमें जीवन बीमा कंपनियों के पास 16887.66 करोड़ रुपए और गैरजीवन बीमा कंपनियों के पास 989.62 करोड़ रुपए जमा है। खास बात यह है कि जीवन बीमा कंपनियों के पास जमा अनक्लेम्ड राशि में हर साल बढ़ोतरी हो रही है।

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