टूटी परंपरा, ब्रीफकेस की जगह फोल्डर में बजट लेकर निकलीं वित्तमंत्री, थोड़ी देर में होगा पेश

नई दिल्ली।

मोदी 2.0 सरकार आज सदन में अपना पहला बजट वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में पेश करेगी। बजट पेश से करने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। अब वह केंद्रीय कैबिनेट में हिस्सा लेंगी, जहां से बजट को मंजूरी मिलेगी।इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब मंत्रालय पहुंचीं तो उन्होंने हर किसी को चौंका दिया। हर बार जब बजट की तस्वीर आती है तब वित्त मंत्री के हाथ में एक ब्रीफकेस रहता है, लेकिन इस बार कुछ अलग नजारा दिखा, उनके हाथ में एक मखमली लाल कपड़ा था जिसमें बजट की कॉपी बंद थी, लाल कपड़े पर अशोक स्तंभ का चिन्ह बना हुआ है।अब तक बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री एक ब्रीफकेस में ही बजट लेकर संसद पहुंचते थे। 

इस पर चीफ इकॉनोमिक एडवाइज़र के. सुब्रमण्यम ने बताया कि ये भारतीय परंपरा है। हम पश्चिमी सभ्यता से अलग दिखना चाहते हैं, क्योंकि ये बजट नहीं है, ये एक बही खाता है।निर्मला सीतारमण का यह पहला बजट होगा। वहीं, 49 साल बाद कोई महिला वित्त मंत्री बजट पेश करेंगी। निर्मला से पहले 1970 में इंदिरा गांधी ने बजट पेश किया था।यह एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट होगा।  उम्मीद की जा रही है कि सीतारमण अपने बजट में खर्च बढ़ाने और कर राहत की घोषणा कर सकती है। इससे पहले फरवरी में आया बजट अंतरिम बजट था लेकिन फिर भी उसमें किसानों, सोशल सेक्टर और आम आदमी से जुड़ी कुछ बड़ी घोषणाएं की गईं। लिहाजा अब चुनाव के बाद पेश होने जा रहे फुल बजट से भी काफी उम्मीदें हैं।

बजट से पहले सामने आए आर्थिक सर्वे से संकेत मिल रहे हैं कि नए बजट में प्राइवेट निवेश की मदद से रोजगार पैदा करने के साथ ही श्रम संबंधी कानून में जरूरी बदलाव, बेहतर टैक्स व्यवस्था और कम ब्याज दर जैसे बिंदुओं पर फोकस करते हुए सरकार देश की अर्थव्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाना चाहेगी।वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्य बजट से पहले इकनॉमिक सर्वे सामने रखा है, जिसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन के ब्लूप्रिंट का जिक्र है। 2024-25 तक वह जिस 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 34 लाख अरब रुपये) की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य लेकर चले हैं, इसके लिए वार्षिक विकास दर हर साल 8 प्रतिशत होनी चाहिए।

बजट में इन बिंदुओं पर रहेगा सरकार का फोकस

-प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली अनुदार राशि में वृद्धि हो सकती है। फिलहाल सरकार की ओर से अभी 6 हजार रुपए दिए जाते हैं।वहीं महिलाओं की सुरक्षा (सार्वजनिक स्थल और सार्वजनिक परिवहन में सीसीटीवी कैमरे लगाने और महिला पुलिस बल बढ़ाने संबंधी आदि) पर नई घोषणा हो सकती है।

-इसके अलावा कामकाजी महिलाओं को 80सी के तहत मिलने वाली आयकर छूट सीमा बढ़ सकती है। वहीं क्रेच सेंटर आदि में बच्चों के केयर सुविधा पर खर्च होने वाली रकम से टैक्स में छूट मिल सकती है। गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना जैसी कई योजनाओं के जरिए फायदा दिया जा सकता है।

-नए बजट में किसानों की स्थिति और बेहतर आय के लिए नई योजनाओं पर सभी की नजर होगी।

-बजट 2019 में सरकार 35 साल बाद दोबारा उत्तराधिकार टैक्स लागू कर सकती है। इसमें प्राप्त संपत्ति, गहनों, शेयर, डिपॉजिट में जमा रकम अगर किसी को उत्तराधिकार में मिलेगी तो उसे टैक्स देना है। इसमें गरीबों को टैक्स के दायरे में नहीं लाया जाएगा। 

-बजट 2019 में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी घटने की भी चर्चा है। फिलहाल सोने पर 10 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी है। वहीं 3 फीसदी जीएसटी भी लगता है। सोने के कारोबारियों की मांग है कि सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 6 फीसदी की जाए। हालांकि जानकारों के मुताबिक सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी 1 फीसदी घटाकर इसे 12 फीसदी के टैक्स स्लैब में लाया जा सकता है।

- मोदी सरकार की 2022 तक सभी लोगों को घर देने की योजना है। इसके तहत रियल एस्टेट बड़ा सेक्टर है। सरकार रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती है। होम लोन लेने वालों के लिए छूट का ऐलान किया जा सकता है। 

- स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की योजानाए हैं। इसके तहत 100 शहरों में काम होगा। इन शहरों में 5151 परियोजनाओं को लागू किया जाएगा। आज सरकार रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कोई बड़ा ऐलान कर सकती है।

-बजट में इनकम टैक्स के स्लैब को 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपए किया जा सकता है। इससे लाखों टैक्सपेयर्स को फायदा होगा। बजट में 80C में छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है।

-निर्मला सीतारमण के पहले बजट में रोजगार बढ़ाने और राजकोषीय घाटा कम करने पर जोर रह सकता है। इसके लिए 10 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर 40 फीसदी की दर से टैक्स लगाया जा सकता है।

-आर्थिक समीक्षा में आगाह किया गया है कि आर्थिक वृद्धि की गति धीमी पड़ने से कर संग्रह पर असर पड़ रहा है और ऐसे में कृषि क्षेत्र में बढ़ता खर्च सरकार के लिए राजकोषीय मोर्चे पर समस्या खड़ी कर सकता है। 



"To get the latest news update download tha app"