पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली का निधन, देशभर में शोक की लहर

नई दिल्ली।

बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली का 66  साल की उम्र में निधन हो गया है।वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे। पूर्व वित्त मंत्री ने ने शनिवार दोपहर 12.07 पर एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें तबियत खराब होने पर 9 अगस्त को भर्ती कराया गया था। जिसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई शीर्ष नेता उनके स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए पहुंचे थे। लेकिन लंबे उपचार के बावजूद तबियत में कोई सुधार नहीं हुआ।जेटली के निधन का समाचार पाकर देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है। गत छह अगस्त को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हुआ। 

दरअसल,  किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अरुण जेटली को बाएं पैर में रेयर कैंसर (सॉफ्ट टिश्यू सरकोमा) हो गया था, उन्‍हें इसके ट्रीटमेंट के लिए जनवरी, 2019 में अमेरिका जाना पड़ा, जहां इसकी सर्जरी की गई। सॉफ्ट टिश्यू सरकोमा रेयर कैंसर है। यह तब होता है, जब कोशिकाएं डीएनए के भीतर विकसित होने लगती हैं। यह कोशिकाओं में ट्यूमर के रूप में विकसित होता है और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैलने लगता है। यह बीमारी शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है, खासकर कंधों और पैरों को अधिक प्रभावित करती है। सर्जरी के जरिये इसे निकाला जा सकता है. इसके अलावाा रेडिएशन और कीमोथेरेपी के जरिये भी इसका इलाज संभव है, लेकिन यह साइज, प्रकार और जगह पर निर्भर करता है।इससे पहले सितंबर, 2014 में डायबिटीज मैनेज करने के लिए जेटली की गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी की गई थी। वहीं, 2005 में उनका दिल से जुड़ा ऑपरेशन भी किया गया था। इसके बाद उनकी कुछ तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसमें वह काफी कमजोर दिख रहे थे।

आपको बता दें कि सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद नौ अगस्त को उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था। इस साल मई में जेटली  को इलाज के लिये एम्स में भर्ती कराया गया था। जेटली पेशे से एक वकील हैं और वह भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल का अहम हिस्सा रहे थे। उन्होंने वित्त एवं रक्षा दोनों मंत्रालयों का कार्यभार संभाला था और उन्होंने प्राय: सरकार के प्रमुख संकटमोचक के तौर काम किया।अपने खराब स्वास्थ्य के कारण ही जेटली ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। पिछले साल 14 मई को एम्स में उनके गुर्दे का प्रतिरोपण हुआ था और उस वक्त उनकी जगह रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। 

इन नेताओं ने जताया शोक

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन का समाचार बेहद दुःखद है।मेरा उनका सदैव करीबी संबंध रहा,उनका निधन राजनैतिक क्षेत्र की एक अपूर्णिय क्षति है। परिवार के प्रति मेरी शोक संवेदनाएँ । ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणो में स्थान व पीछे परिजनो को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे।

कमलनाथ, मुख्यमंत्री , मप्र

अरुण जेटली के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने लिखा है। अरुण जेटली जी के निधन से अत्यंत दुःखी हूं, जेटली जी का जाना मेरे लिये एक व्यक्तिगत क्षति है। उनके रूप में मैंने न सिर्फ संगठन का एक वरिष्ठ नेता खोया है बल्कि परिवार का एक ऐसा अभिन्न सदस्य भी खोया है जिनका साथ और मार्गदर्शन मुझे वर्षो तक प्राप्त होता रहा।

अमित शाह, गृहमंत्री

अरुण जेटली जी के रूप में एक दोस्त और बेहद महत्वपूर्ण साथी खोकर बेहद दुख में हूं। वो प्रोफेशन से एक प्रोफिशिएंट वकील थे और पैशन से शानदार राजनेता।उन्होंने देश की कई क्षमताओं के साथ सेवा की और वो पार्टी के साथ ही सरकार के लिए एक असेट थे।

राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री 

जेटली जी सिर्फ़ एक राजनेता नहीं बल्कि वरिष्ठ अधिवक्ता भी रहे।उनका जाना देश  के लिए बड़ी क्षति है।उनके निधन पर प्रदेश भाजपा की ओर से मैं दुःख प्रकट करता हुँ।

राकेश सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, बीजेपी

ऐसा रहा राजनीतिक कैरियर

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली के घर दिल्ली में हुआ था। उनके पिता भी वकील थे।उनकी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, नई दिल्ली से 1957-69 में पूरी हुई।

-1973 में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, नई दिल्ली से कॉमर्स में स्नातक किया। 

-1977 में दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय से उन्होंने कानून की डिग्री प्राप्त की। 

-1974 में वे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष भी रहे।

-1991 से जेटली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। 

1999 के आम चुनाव से पहले की अवधि के दौरान वह भाजपा के प्रवक्ता बने।

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार में उन्हें सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किया गया था।

राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद 23 जुलाई 2000 को जेटली को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला।

1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी)  छात्रसंघ के अध्यक्ष भी बने थे।

1975-77 में 19 महीनों तक आपातकाल के दौरान वे मीसाबंदी थे और इसके बाद जनसंघ में शामिल हो गए थे।

वकील होने के नाते 1977 से उच्चतम न्यायालय तथा देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में उन्होंने वकालत भी की थी।

1989 में जेटली को विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था।

2014 के आम चुनाव में, उन्होंने अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और अमरिंदर सिंह (कांग्रेस उम्मीदवार) से हार गए।


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