प्रदेश की राजधानी से उठेगी शिक्षा नीति में सुझाव की आवाज

भोपाल। देश की पुरानी व्यवस्था में शिक्षा के लिए गुरुकुल पद्धति का दबदबा रहा है। वैसी ही स्थिति मदरसों से दी जाने वाली तालीम की मानी जाती है। बदलते दौर के साथ अब गुरुकुल व्यवस्था कम होते हुए खत्म हो चुकी है। मदरसों के जो हालात फिलहाल बने हुए हैं, वे भी इस तरफ इशारा करते हैं कि आने वाले दिनों में इस व्यवस्था पर भी पूर्ण विराम लग सकता है। गुरूकुल और मदरसा शिक्षा व्यवस्था देश, समाज और इंसानी रिश्तों की तालीम देकर पीढ़ी को संस्कृति के सूत्र में बांधे रखने वाली साबित होती रही है। इन व्यवस्थाओं को बरकरार रखने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी अपनी शिक्षित होने के बाद भी संस्कृति से विमुख दिखाई न दे।

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की दिल्ली में होने वाली बैठक में इस बारे में मप्र से सुझाव शामिल किया जाने वाला है। आयोग के सदस्य भोपाल निवासी सैयद इम्तियाज अली ने इस सुझाव को प्रदेश के दानिशवरों और शिक्षाविदों से मशविरा कर तैयार किया है। इम्तियाज ने बताया कि वे इस बहुआयामी बैठक में अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को दी जाने वाली सरकारी स्कालरशिप के तरीकों में बदलाव को लेकर सुझाव देने वाले हैं। इस दौरान उनका तर्क यह होगा कि स्कॉलरशिप के लिए लागू ऑनलाइन व्यवस्था बेहद जटिल और आम विद्यार्थियों के लिए मुश्किल है। जिसका नतीजा यह है कि सरकारों की मंशा के बावजूद जरूरतमंद विद्यार्थी इसका फायदा नहीं उठा पाते हैं। सैयद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की इस बैठक में स्कॉलरशिप के लिए उपयोग किए जाने वाले साफ्टवेयर और आवेदन प्रक्रिया के सरलीकरण का सुझाव रखेंगे। उन्होंने बताया कि गुरूकुल और मदरसा शिक्षा पद्धति देश की संस्कृति को बचाए और बनाए रखने के लिए अहम किरदार निभा सकती हैं। इन व्यवस्थाओं को जारी रखने के लिए कोई बीच का रास्ता निकालने की कवायद किए जाने का प्रस्ताव भी वे बैठक में देने वाले हैं।

नीति निर्धारकों की होगी मौजूदगी

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की दिल्ली में होने वाली इस बैठक में मानव संसाधन मंत्री, सचिव और देशभर के सभी नीति निर्धारकों की मौजूदगी होगी। सैयद इम्तियाज ने बताया कि साल में करीब चार बार होने वाली इन बैठकों में शिक्षा की गुणवत्ता और तरीकों को लेकर प्रस्ताव एवं सुझाव शामिल किए जाते हैं। इनके आधार पर ही आगामी शिक्षा नीतियों का निर्धारण किया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछली बैठकों में शामिल कई प्रस्तावों के आधार पर ही मौजूदा शिक्षा नीति में कई बदलाव और संशोधन किए गए हैं।

प्रदेश से इकलौते सदस्य

राजधानी भोपाल के समाजसेवी सैयद इम्तियाज अली राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के प्रदेश के इकलौते सदस्य हैं। शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े सैयद अपनी बेहतर गतिविधियों के चलते कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े भोपाल मॉडल को दुनियाभर में सराहा गया है और अपनाया भी गया है। सैयद फिलहाल जेएनयू के कोर्ट ऑफ मेम्बर भी हैं।

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