शिवराज के बाद BJP नेता के समर्थन में उतरे कांग्रेस विधायक, गर्माई सियासत

भोपाल।

पुलिस द्वारा बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह (मम्मा) से 23 लाख 76 हजार 280 रुपए वसूलने को लेकर जमकर सियासत गर्मा गई है।एक तरफ बीजेपी ने पुलिस के इस फैसले पर सवाल उठाए है और वापस लेने की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो इसके लिए सरकार और पुलिस को सीधे तौर पर धमकी दे ड़ाली है। वही दूसरी तरफ कांग्रेस के एक विधायक ने भी पूर्व विधायक का समर्थन किया है।उन्होंने पुलिस के इस फैसले को गलत बताया है।  विधायक के समर्थन के बाद कांग्रेस में हड़कंप मच गया है।

दरअसल, शिवराज के बाद अब कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने भी पूर्व विधायक का समर्थन किया है। आज मीडिया से चर्चा के बाद चौधरी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई गलत है पता नहीं कैसे पुलिस ने वसूली का नोटिस भेजा । लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का हक है। लोकतंत्र में धरना प्रदर्शन नहीं होंगे तो लोग अपनी बात कैसे रखेंगे। किसी पर भी वसूली की कार्यवाही ठीक नहीं है।नेताओं को भी  जनता के हितों का ध्यान रखना चाहिए। मुझे लगता है मुख्यमंत्री जी पुलिस के इस फैसले को निरस्त करेंगे।

शिवराज ने दी फैसला वापस लेने की धमकी

 ये तुगलकी फैसला है । सरकार जनाक्रोश से डरी हुई है। इन्हें डर है रोज ऐसे ही प्रदर्शन होंगे। लोग इंदिरा जी के आपातकाल के दौरान दमन नीतियों से नहीं डरे तो इससे क्या। कमलनाथ जी आपकी कुचलने वाली नीतियों  को कुचल देंगे। ऐसा मध्य प्रदेश नहीं देश के राजनीतिक इतिहास में कभी नहीं हुआ।कमलनाथ बीजेपी को डराने ओर दबाने की कोशिश कर रहे है।हम अपील करते है सरकार लोकतंत्र को कुचलने के तुगलकी फरमान ना निकाले । वही उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि मैं भी देखूंगा कितनों की संपत्ति जप्त करते है।

दरअसल,  गुमठी व्यापारियों के समर्थन में बिना अनुमति के सीएम हाउस, वल्लभ भवन, पुलिस महानिदेशक और संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव के चार इमली स्थित बंगले का घेराव के मामले में पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह (मम्मा) से 23 लाख 76 हजार 280 रुपए का नुकसान करने का आरोप लगा है। इसके चलते इन पैसों की वसूली अब पूर्व विधायक से की जाएगी। पुलिस ने इसका प्रस्ताव तैयार कर कलेक्टर तरुण पिथोड़े को भेज दिया है। पुलिस ने इसके पीछे तर्क दिया है कि 20 अगस्त को पूर्व विधायक सिंह और उनके समर्थकों द्वारा सीएम हाउस सहित 12 अलग-अलग स्थानों से घेराव किया गया था। इसके चलते पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ता था। कानून व्यवस्था में पुलिस के जवानों और अफसरों की ड्यूटी लगाई गई थी, इसके चलते पुलिस पुलिस प्रशासनिक, विभागीय और न्यायालयीन से जुड़े काम नहीं कर पाई।  आकस्मिक ड्यूटी के चलते पुलिस को 23 लाख 76 हजार 280 रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। इधर, पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह का कहना है कि 42 साल की उनकी राजनीतिक सफर में यह पहली घटना है, जब प्रदर्शन करने पर जुर्माना वसूली की बात की जा रही है। 



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