झाबुआ उप चुनाव से पहले कांग्रेस ने फेरा बीजेपी की उम्मीदों पर पानी

भोपाल। मध्य प्रदेश में झाबुआ विधानसभा सीट पर उप चुनाव होना है। लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी विधायक जीएस डामोर के सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई है। प्रदेश के प्रमुख दल बीजेपी और कांग्रेस इस पर दोबारा जीत के लिए पूरी ताकत झौंक रहे हैं। कांग्रेस का इस सीट पर लंबे समय से कब्जा रहा है। एक बार फिर इस सीट को जीतने के लिए अब कांग्रेस सरकार पूरा प्रयास कर रही है। यही कारण है मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर साहूकारों द्वारा लिए गए कर्ज को माफ करने का ऐलान भी किया है। 

कांग्रेस के लिए इस सीट को जीतना बहुत जरूरी हो गया है। पार्टी की स्थिरता को लेकर लगातार सवाल हो रहे हैं अगर पार्टी यह सीट जीत जाती है तो कांग्रेस बहुमत से सिर्फ एक सीट दूर रहेगी। वहीं, उसको बाकी विधायकों का बाहर से समर्थन मिला हुआ है। राजनीति के पंडितों का कहना है कि कांग्रेस सरकार के यह फैसला उप चुनाव में बड़ा बदलाव ला सकता है। कांग्रेस ने अपने खाते में बड़ी संख्या में वोटर इस फैसले से जोड़ने का प्रयास किया है। जिसका नतीजा बीजेपी के लिए काफी चौंकाने वाला आ सकता है। झाबुआ में बड़ी संख्या में आदिवासी हैं जो साहूकारों के कर्ज में डूबे हुए हैं। ऋण माफ करने के अलावा, आदिवासियों को डेबिट कार्ड दिए जाएंगे, जिसमें 10,000 रुपये की निकासी सीमा होगी। सरकार आदिवासियों के मुफ्त में जमीन और माल प्राप्त करने में भी मदद करेगी। नाथ की घोषणाओं ने आदिवासियों को खुश कर दिया है। यह कहा गया था कि झाबुआ उपचुनावों के दौरान कांग्रेस के पास कठिन समय होगा क्योंकि पहले से ही गुटबाजी हावी हो रही है। लेकिन इस घोषणा बाद से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश आ गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया को झाबुआ से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार, भूरिया, उनके बेटे और पूर्व विधायक ज़ेवियर मेडा दावेदार हैं।

टिकट वितरण के बाद कांग्रेस नेताओं को डर है कि भूरिया और मेदा दावेदार हैं। नाथ की घोषणाओं ने कांग्रेस के पक्ष में परिदृश्य बना दिया है। भाजपा के लिए उपचुनाव जीतना आसान नहीं होगा क्योंकि उसके पास मजबूत उम्मीदवार की कमी है। नाथ के इस कदम ने भाजपा की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है।

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