स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेशवासी देख सकेंगे झिलमिलाता राजभवन, आम जनता के लिए खुलेंगे द्वार

भोपाल| राज्यपाल लालजी टंडन ने राजभवन को आम नागरिकों के लिए खुला रखने की व्यवस्था को यथावत जारी रखने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के दौरान गत वर्ष के समान इस वर्ष भी आम नागरिकों को राजभवन अवलोकन की दी गई सुविधा को भी यथावत रखने के लिए कहा है।   राजभवन आमजन के भ्रमण के लिए स्वतंत्रता दिवस के पूर्व 13 अगस्त को शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहेगा। नागरिक आकर्षक विद्युत साज-सज्जा के साथ ही बच्चों की प्रस्तुतियों का आनंद भी ले सकेंगे। सांस्कृतिक संध्या का आयोजन शाम 7 बजे होगा। राजभवन में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राजभवन में रहने वाले परिवारों के बच्चे, कुम्हारपुरा स्थित राजभवन शासकीय स्कूल के 130 बच्चे एवं शासकीय कमला नेहरू स्कूल के बच्चे विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। राजभवन द्वारा कमजोर एवं पिछड़े वर्ग के बच्चों को प्रतिभा-प्रदर्शन का मंच उपलब्ध कराने की यह अभिनव पहल होगी।

सरस्वती वंदना नृत्य-प्रस्तुति से सांस्कृतिक संध्या का प्रारंभ होगा। अनेकता में एकता के संदेश की 25 बच्चों द्वारा भव्य सामूहिक प्रस्तुति दी जायेगी। आंचलिक प्रस्तुतियाँ भी कार्यक्रम में शामिल की गई हैं। "रंगीलो मारो ढोलना" की रंगारंग प्रस्तुति 5 बच्चों द्वारा संयुक्त रूप में दी जायेगी। नृत्य प्रस्तुतियों के क्रम में लोक-नृत्य कालबेलिया एवं तेरह तालिका मिश्रण की नृत्य प्रस्तुति में 17 बच्चे प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। गीत प्रस्तुतियाँ भी होंगी। मुख्य आकर्षण "कौम की खादिम की है जागीर" वंदे मातरम गीत में 9 बच्चों द्वारा गायन प्रतिभा का प्रदर्शन होगा। इसी तरह "सुमन अर्पित आजादी के" और "कश्मीर न देंगे" जैसे गीतों की प्रस्तुति भी होगी। गांधीजी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में उन पर केन्द्रित विशिष्ट नाट्य प्रस्तुति का मंचन भी होगा। प्रस्तुति का उद्देश्य बच्चों को गांधीजी के आचार-विचार से अवगत कराना और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को रेखांकित करना है। प्रस्तुति में 86 बच्चे अपनी नाट्य-कला की मंच प्रस्तुति देंगे।

राजभवन में इस दिन आने वाले नागरिक चित्र-प्रदर्शनी भी देख सकेंगे। प्रदर्शनी में भविष्य के कर्णधार स्वतंत्रता-संघर्ष के वीरों से परिचित होंगे। बच्चों में राष्ट्रभक्ति और देश के लिए सर्वस्व अर्पित करने की भावनायें संचारित होगी। प्रदर्शनी को देखकर सेनानियों के व्यक्तित्व-कृतित्व के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने की जिज्ञासा भी उत्पन्न होगी, जो इतिहास के पन्नों पर दर्ज है। अभिभावक भी बच्चों को कड़े स्वतंत्रता संघर्ष का विवरण और आजादी की महत्ता समझा पायेंगे। आकर्षक विद्युत सज्जा उन्हें एहसास कराएगी कि आज का दिन सबके लिए क्यों खास है। 


वल्र्ड बुक में दर्ज 

 गत वर्ष राजभवन को अवलोकन के लिये खोले जाने की व्यवस्था का आम नागरिकों ने स्वागत किया था। मात्र 6 दिन में एक लाख से अधिक लोगों ने राजभवन का अवलोकन कर नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। वल्र्ड बुक ऑफ रिकार्डस यू.के. लंदन द्वारा इसे विश्व रिकार्ड के रूप में दर्ज कर राजभवन को प्रमाण-पत्र दिया गया है। 

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