सिंधिया के लिए आसान नहीं पीसीसी चीफ का ताज

भोपाल।

राजनीतिक हलकों में चर्चा गर्म है कि प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस की कुर्सी पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की ताजपोशी होने जा रही है ।इस तरह की अफवाह तेजी पकड़ गई है कि प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद सोनिया गांधी ने भी अब सिंधिया के नाम को हरी झंडी दे दी है और जल्द उनके नाम की औपचारिक घोषणा हो जाएगी। सबकी निगाहें अब मंगलवार 10 सितंबर को सोनिया और सिंधिया की मुलाकात पर टिकी है लेकिन राजनीति के पंडितों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाने का निर्णय लेना सोनिया गांधी के लिए इतना आसान नहीं है।

दरअसल बमुश्किल बहुमत का आंकड़ा जुटा पाई कमलनाथ सरकार में इस समय दिग्विजय गुट का दबदबा है और बड़ी तादाद में विधायकों का एक समूह सिंधिया को अध्यक्ष की कुर्सी न देने के पक्ष में है। इसके पीछे ज्योतिरादित्य सिंधिया का आम कर कर्ताओं के साथ व्यवहार मुख्य वजह बताई जा रही है ।सिंधिया विरोधी कहते हैं कि उनके भीतर अभी भी महाराज शाही कूट-कूट कर भरी है और यदि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है तो आम कार्यकर्ता और संगठन के मुखिया के बीच संवाद सहज और सरल नहीं हो पाएगा। ऐसे में कांग्रेस की मजबूती कैसे होगी? इतिहास गवाह है कि ज्योतिरादित्य के पिता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया को भी अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह की जोड़ी ने कभी मध्य प्रदेश की राजनीति में हावी नहीं होने दिया। ऐसे में सिंधिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बन पाएंगे तो यह अपने आप में आश्चर्यचकित कर देने वाली बात होगी।

जब माधव राव की जगह दिग्गी बन गए थे अध्यक्ष

थोड़ा पीछे के राजनैतिक इतिहास पर नजर डाली जाए तो आज से 35 साल पहले यानि 1984 याद आता है जब प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की बात आयी थी तब तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता सिंधिया घराने के प्रमुख माधवराव को रोकने के लिए अपने शिष्य दिग्विजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनवा दिया था। राजनीति से जुड़े लोग बताते हैं कि तब केन्द्रीय राजनीति में अर्जुन सिंह की मदद कमलनाथ ने की थी। आज समय बदला है हालात बदले हैं लेकिन किरदार वही हैं, सिंधिया,नाथ और सिंह। अंतर सिर्फ इतना है कि सिंधिया सरनेम से पहले  लगने वाला नाम बदला है अब माधवराव सिंधिया की जगह ज्योतिरादित्य सिंधिया है। जिन्हें रोकने के लिए कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी सक्रिय है।

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