नगरीय निकाय चुनाव पर 'संकट', नियम बदलने कैबिनेट में लाया जाएगा प्रस्ताव

भोपाल। मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में नगरीय निकाय चुनाव होना हैं। लेकिन इन चुनाव को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बार नगरीय निकाय चुनाव में करीब चाह महीने तक की देरी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदेश में कई जिलो में परिसीमन होना था। लेकिन परिसीमन समय पर नहीं होने के कारण यह स्थिति बन गई है। बताया जा रहा है चुनाव के 6 महीने पहले परिसीमन होने जरूरी था। लेकिन अब दिसंबर से पहले परिसीमन होना मुमकिन नहीं है।

इसलिए राज्य सरकार नगरीय निकाय निकाय अधिनियम में बदलाव करने जा रही है। नियमों में बदलाव के बाद दो महीने पहले भी परिसीमन हो सकेगा। इसका बिल तैयार कर लिया गया है। विधि विभाग ने भी इस बिल पर अपनी सहमती दे दी है। जल्द ही इसको कैबिनेट में लाया जाएगा। प्रदेश भर में 16 नगर निगम, 98 पालिका और 294 नगर परिषद हैं। इनमें से 297 का कार्यकाल 15 जनवरी 2020 तक समाप्त हो जाएगा। चुनाव टलने की स्थिति में निकायों की कमान प्रशासक को सौंपी जा सकती है। 

कैबिनेट में मंजूरी का इंतजार

इस अध्यादेश को कैबिनेट की मंज़ूरी मिलते ही सरकार परिसीमन शुरू करेगी। बाद में हर निकाय में आबादी के हिसाब से वार्ड निर्धारण और अंत में वार्ड का आरक्षण होगा। पूरी प्रक्रिया में लगभग चार महीने का वक्त लगने की संभावना है। ऐसे में सरकार निकाय चुनाव पूरी तैयारी जनवरी तक कर पाएगी। यह काम अंजाम देने तक जनवरी का महीना शुरू हो सकता है। एक जनवरी के बाद मतदाता सूची का नए सिरे से पुनरीक्षण कराना अनिवार्य है। फोटो युक्त मतदाता लिस्ट पुनरीक्षण कराने में दो से तीन महीने का समय लगेगा। इसलिए निकाय चुनाव में तय समय से चार माह तक की देरी हो सकती है।  वहीं भोपाल महापौर ने सवाल उठाया है कि सरकार निकाय चुनाव नहीं कराना चाहती है| 

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