वचन पत्र के इस वादे को अब तक पूरा नहीं कर पाई सरकार

भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले जनता से वचन पत्र में कई वादे किए थे। इनमें से प्रदेश में हुए कई घोटालों की जांच करवाने का वादा भी एक था। लेकिन सत्ता में आने के 9 महीने के बाद भी अब तक पौधरोपण घोटाले की जांच शुरू नहीं हुई है। भाजपा के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए पौधरोपण के नाम पर करोड़ों का घोटाला करने के आरोप भाजपा सरकार पर लगाए थे। लेकिन सत्ता में आने के बाद अब तक जांच के संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।  

सीएम कमलनाथ ने पिछले सत्र में राज्य विधानसभा में 500 करोड़ रुपये के नर्मदा वृक्षारोपण घोटाले की जांच के लिए पांच मंत्रियों की एक समिति बनाई थी। वित्त मंत्री तरुण भनोट की अध्यक्षता वाली समिति में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल, कृषि मंत्री सचिन यादव, पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे के अलावा वन मंत्री उमंग सिंघार हैं। कमेटी के गठन को तीन महीने हो चुके हैं लेकिन अब तक इस बारे में इस समिति की कोई बैठक नहीं हो पाई है। हालांकि, वन मंत्री उमंग सिंघार ने बयान दिया था कि घोटालों को उजागर करने के लिए बैठक का होना जरूरी है। मैंने अपनी ओर से इस संबंध में कदम उठाया था। मैं बैतूल में ओचक निरीक्षण करने के लिए गया था। और इस दौरान वहां बहुत सी गड़बड़ियां भी मिलीं। इस अभियान में कई विभाग शामिल थे इसलिए समिति का गठन किया गया। मैंने वन विभाग के लिए अपनी भागीदारी की, लेकिन पंचायत विभाग, बागवानी और अन्य विभागों को भी जांच करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समिति की बैठक जल्द ही बुलाई जाएगी।

गौरतलब है कि 2 जुलाई 2017 को नर्मदा किनारे पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा प्रदेश भर में पौधरोपण का अभियान शुरू किया गया था। भाजपा सरकार का दावा था कि उसने प्रदेश भर में  455 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इस मामले को लेकर विधानसभा चुनाव के दौरान पिछले साल कांग्रेस ने इस मुद्दे को जमकर भुनाया था। और जांच करवाने की बात भी कही थी। भाजपा सरकार ने दावा किया था कि नर्मदा किनारे करीब 6 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया था। यह एक दिन में सबसे अधिक पौधरोपण का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन था। इसके लिए शिवराज सरकार ने गिनीज़ रिकॉर्ड के लिए भी आवेदन दिया था। करोड़ों खर्च करने के बाद भी सरकार रिकार्ड बनाने में नाकाम रही थी। जिसके बाद उसके काम पर सवाल भी उठे थे।

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