मुहर्रम पर दिग्विजय सिंह ने किया ऐसा ट्वीट, लोगों ने चौतरफा घेरा

भोपाल| अक्सर अपने बयानों और ट्वीट को लेकर विवादों में रहने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपने ट्वीट को लेकर घिर गए हैं| देश भर में आज इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग मुहर्रम का मातम मना रहे हैं। इस बीच दिग्विजय ने ऐसा ट्वीट कर दिया, जिस पर लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया| इतना ही नहीं कुछ लोगों ने उन्हें खुद को कोड़े लगाने और वीडियो अपलोड करने की सलाह भी दी है तो कई लोग उनके ट्वीट पर अपना विरोध जाता रहे हैं| हालांकि दिग्विजय अक्सर अपने ट्वीट को लेकर ट्रोल होते रहते हैं| 

दरअसल, मुहर्रम को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया है| उन्होंने ट्वीट में लिखा- सभी मुस्लिम भाईयों और बहनों को मुहर्रम के पावन अवसर पर हमारी सलाम। दिग्विजय सिंह का ये ट्वीट देखते ही लोग अपना विरोध जताने लगे| क्यूंकि मुहर्रम पर मातम मनाया जाता है | इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार मुहर्रम को मातम का महीना कहा जाता है। लेकिन कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इसे ‘पावन’ बता दिया| जिसके बाद लोगों ने घेरना शुरू कर दिया, वही कुछ लोग दिग्विजय सिंह के इस ट्वीट पर सवालिया निशान भी खड़े कर रहे हैं।

इस्लामिक कैलेंडर में साल का पहला महीना मुहर्रम का होता है, जिसे गम का महीना भी कहा जाता है|  मुस्लिम इस महीने में खुशियां नहीं मनाते हैं, बल्कि मातम मनाया जाता है| पूरे महीने का सबसे अहम दिन होता है 10वां मुहर्रम, जो 10 सितंबर को है| इसी दिन पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद के नाती हजरत इमाम हुसैन की कर्बला की जंग (680 ईस्वी) में परिवार और दोस्तों के साथ हत्या कर दी गई थी|  मान्यता है कि उन्होंने इस्लाम की रक्षा के लिए अपनी जान दी थी. शिया मुस्लिम इस दिन को हुसैन की शहादत को याद करते हुए काले कपड़े पहनकर मातम करते हैं| 


इस तरह घिरे दिग्विजय 

डॉ जी बघेल नाम के यूजर ने लिखा- मुहर्रम तो मातम होता है, फिर ये पावन कैसे हो गया. क्या तुम भारत के मुस्लिमों का मज़ाक़ उड़ा रहे हो उनके मातम को पावन बोल कर.  लगता हैं अंधेर नगरी पार्टी कोंग्रेस में सभी चौपट हैं

जनार्दन मिश्रा(@JBMIS) नाम के यूजर ने लिखा- ऐसे दिल नहीं जीत पाओगे मुसलमानों का, दो-चार कोड़े अपने बदन पर मारो और उसका वीडियो बनाकर अपलोड करो। तब सच्ची मुबारकबाद मानी जायेगी।

अमित पांडे(@dr_amitpandey) नाम के अन्य यूजर ने लिखा- मुहर्रम वो मनहूस दिन है (शियों के अनुसार) जिस दिन हुसैन की यजीदी के द्वारा हुई हत्या पर वो मातम मनाते हैं। इस दिन वो ताजिया निकालते हैं और हुसैन की मृत्यु पर गहरा रोष प्रकट करते हैं। मौत का दिन पावन नहीं मनहूस होता है।

शुभ्रा सुमन(@Anu1021996) नाम की यूजर ने लिखा- मुहर्रम पर कौन सलाम करता है और अगर अपनी हाजिरी लगानी थी तो खुद को भी कोड़ों से मार कर बता देते कि सच्चे मुसलमान हो।

वहीं सचिन श्रवास्तव(@DrSachinSrivas1) ने लिखा- ईद पर जालीदार टोपी लगा कर सेवईयां खाने वाले सेकुलर नेता आज गंगा जमुनी तहजीब को और मजबूत करने के लिए मुहर्रम पर खुद को कोड़े मारेंगे क्या ?  

सईद अज़ीम @Syedazeemmzn नाम के यूजर लिखते हैं मुख्यमंत्री साहब किसी से मालूम ही कर लेते की मोहर्रम की मुबारकबाद नही दी जाती...इसी तरह कई यूजर ने उन्हें ट्रोल किया है| 


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