दिग्विजय के रिश्तेदार से रिश्वत मांगना अधिकारी को पड़ा महंगा

भोपाल/ग्वालियर।

सहकारिता और सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री डाॅ. गाेविंद सिंह के आरोपों के बाद संयुक्त पंजीयक एवं आयुक्त सहकारिता अभय खरे, वरिष्ठ अधीक्षक राधेलाल जाटव और अंकेक्षण अधिकारी रविंद्र शर्मा काे सस्पेंड कर दिया गया है।बता दे कि अभय खरे वही है जिसके खिलाफ अवैध नियुक्तियों सहित अन्य मामलों की जांच चल रही है।

दरअसल, रविवार को ग्वालियर में प्रेसवार्ता के दौरान सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने अपनी ही सरकार के अधिकारियों को रिश्वत और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने बताया कि अधिकारियों ने एक व्यक्ति से रिश्वत मांगी, उन्होंने खुद फोन किया तो अधिकारियों ने रिश्वत की रकम 50 हजार से घटाकर 25 हजार कर दी। उन्हाेंने कहा कि रिश्वतखाेरी और भ्रष्टाचार में लिप्त काेई भी अधिकारी और कर्मचारी बख्शा नहीं जाएगा।

 खास बात ये है कि गुना गड़ा सहकारी बैंक के संचालक  सुमेर सिंह पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह के रिश्तेदार हैं और पहले पीएसी के मेंबर भी रह चुके हैं ।अभय खरे द्वारा सीधे उनके बैंक के ऑडिट को क्लियर करने के लिए ₹25000 रिश्वत की मांग की गई थी। जब सुमेर सिंह ने यह बात मंत्री सहकारिता  डा.गोविंद सिंह के संज्ञान में लाई तो उन्होंने अधिकारी को फोन कर कर ऐसा न करने को कहा। बावजूद इसके अबे खरे रिश्वत मांगने की जिद पर अड़े रहे और फिर गोविंद सिंह को यह पड़ा कदम उठाना पड़ा

उन्होंने सहकारिता विभाग के संयुक्त आयुक्त अभय खरे के बारे में बताया कि गुना की गढा सहकारी नागरिक बैंक के प्रबंधन ने उनसे शिकायत की थी कि उनके सारे दस्तावेज होने के बाद भी एनओसी लैटर संयुक्त पंजीयक नहीं दे रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने स्वयं फोन कर कहा। उसके बाद भी संयुक्त पंजीयक ने कार्य नहीं किया हां 50 हजार की जगह 25 हजार रूपये मांगे। इसकी जानकारी जब उन्हें लगी तो उन्होने तत्काल प्रभाव से संयुक्त आयुक्त तथा वहीं पर पदस्थ अंकेक्षण अधिकारी रवीन्द्र शर्मा और वरिष्ठ अधीक्षक राधेलाल जाटव को निलंबित किया जायेगा। जिसके बाद अधिकारियों ने रविवार को ही मंत्रालय पहुंचकर निलंबन का आदेश जारी किया है। निलंबन के दौरान प्रबंधक अभय खरे भोपाल मुख्यालय में अटैच रहेंगे।


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