महापौर चुनाव बिल पर आज फैसला कर सकते हैं राज्यपाल

भोपाल। मध्‍य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों से पहले महापौर चुनाव बिल को लेकर सियासत तेज हो गई है। यह अध्यादेश फिलहाल राजभवन में अटका हुआ है, राज्यपाल की रोक के बाद कांग्रेस और बीजेपी आमने सामने हो गई है। एक तरफ कांग्रेस इसे बिना किसी दबाव में आकर मंजूरी देने की बात पर अड़ी हुई है, तो वही दूसरी तरफ विरोध करते हुए बीजेपी हाईकोर्ट जाने की तैयारी में जुट गई है। इससे राजभवन व राज्य सरकार के बीच भी पशोपेश की स्थिति बन गई है। इस बीच खबर है कि राज्यपाल लालजी टंडन आज सोमवार को इस मामले में अपना फैसला सुना सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल ने अधिकारियों से इस प्रावधान को लेकर पूछताछ भी की है। सबकी निगाहें अब राज्यपाल के फैसले पर टिक गई है।

इससे पहले शनिवार देर रात को नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह और प्रमुख सचिव संजय दुबे ने राज्यपाल से मुलाकात कर राज्य सरकार का रूख स्पष्ट कर दिया है कि वह नई प्रणाली से ही चुनाव कराने के अपने फैसले पर अडिग है।  वही ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल के संगठन मंत्री एवं पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने राज्यपाल से मिलकर मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से नहीं, बल्कि सीधे जनता के चुनाव से किए जाने की मांग की है। इधर,  नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसे राजपत्र में प्रकाशन के लिए भी भेज दिया है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल लालजी टंडन ने सरकार की चुनाव प्रणाली में बदलाव संबंधी तर्कों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जिस पर आज अपना फैसला सुना सकते है।

कांग्रेस के ट्वीट पर भाजपा का रीट्वीट

राज्यपाल द्वारा निकाय चुनाव व्यवस्था में बदलाव के अध्यादेश को मंजूरी नहीं दिए जाने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने ट्वीट किया है। उन्होंने उनसे आग्रह किया है कि अध्यादेश को न रोकें, आप एक कुशल प्रशासक थे और हैं। संविधान में राज्यपाल कैबिनेट की अनुशंसा के तहत कार्य करते हैं। इसे राज्य धर्म कहते हैं।विपक्ष की बात सुनें मगर महापौर चुनाव बिल न रोकें। यह गलत परंपरा होगी। जरा सोचिए। वहीं, भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने तन्खा के ट्वीट के प्रत्युत्तर में एक अन्य ट्वीट कर कहा कि संविधान का पालन और उसका संरक्षण राज्यपाल का राजधर्म होता है। राजधर्म की व्याख्या अपने कांग्रेसी हितों की दृष्टि से नहीं की जा सकती।

कोर्ट जा सकती है भाजपा

इधर,ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल के संगठन मंत्री एवं पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता को शनिवार को दिल्ली बुलाकर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पूरी स्थितियों की जानकारी ली। फिलहाल प्रदेश भाजपा की ओर से कहा गया है कि वे पुरजोर तरीके से विरोध कर रहे हैं, लेकिन चुनाव कैसे हों, इसका अधिकार राज्य सरकार के पास है। इस पर केंद्रीय संगठन ने कहा कि विरोध के साथ पार्टी हाईकोर्ट में बिल को चुनौती दे।




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