सरकार, कलेक्टर पर आखिर क्यों इतनी मेहरबानी!

छतरपुर।

छतरपुर के भाजपा विधायक राजेश प्रजापति को कलेक्टर छतरपुर मोहित बुन्दस द्वारा एक घंटे तक इंतजार कराने का मामला गरमा गया है। जन समस्याओं को लेकर कलेक्टर से मिलने पहुंचे विधायक के साथ कलेक्टर का अमर्यादित रुवैया राजनीतिक प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है ।

वही कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा ने भी छतरपुर कलेक्टर की निंदा की। मामला चीफ सेकेट्री और सीएम तक पहुंचा गया है। मामला विपक्षी दल के विधायक से जुड़ा होने के कारण फिलहाल सत्ता पक्ष ने इस बारे में कोई रूख नहीं अपनाया है लेकिन छतरपुर जिले के कांग्रेस के तीनों और समाजवादी पार्टी के एक विधायक भी कलेक्टर के व्यवहार और कार्यशैली पर पहले भी सवालिया निशान खड़े कर चुके हैं। 

चारो विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कलेक्टर को तुरंत जिले से हटाने की यह कहकर मांग की थी कि वे महीनो तक विधायकों को मिलने का समय नहीं देते ।बावजूद इसके कलेक्टर हैं कि अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं बुन्दस की प्रशासनिक क्षमताओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी सवालिया निशान खड़े करते रहे हैं । बावजूद इसके उन्हें छतरपुर जैसे जिले का कलेक्टर किसने और क्यों बनाया ,यह समझ से परे है।कलेक्टर छतरपुर की कार्यशैली आने वाले समय में कमलनाथ सरकार के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है।

ना जनता की सुनते और ना ही विधायकों की

छतरपुर कलेक्टर पर आरोप है कि वह ना तो जनता की सुनते है और ना ही विधायकों ।ना ही वे किसी से मिलते है। जनप्रतिनिधियों को भी मिलने के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता है।हाल ही में एक दिव्यांग कलेक्टर के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचा था तो उसे ग्वालियर भेज दिया।  इसकी वजह से जनता के बीच उनकी किरकिरी हो रही है। विधायकों का आरोप है कि जनता के बीच सरकार की योजनाएं नही पहुंच रही है, उनका क्रियान्वयन ठीक ढंग से नही हो रहा है, अधिकारी भी अपनी मनमानी कर रहे है। विधायकों ने सीएम को पत्र लिख कलेक्टर को हटाने की मांग की है और कई बार मिलकर भी इस ओर संकेत दे चुके है। 


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