अब बीजेपी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने की सिंधिया के समर्थन की तारीफ

भोपाल। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर कांग्रेस नेताओं में अलग अलग राय सामने आ रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्यातिरादित्य सिंधिया ने भी सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। उनके इस समर्थन के बाद से कांग्रेस में असमंजस तो बीजेपी खेमे में खुशी का माहौल है। बीजेपी नेता उनके इस समर्थन को उनकी दादी और बीजेपी की संस्थापक सदस्य राजमाता से जोड़कर देख रहे है। बीजेपी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सिंधिया संघ विचार धारा के घराने से ही आते हैं। उनके पिता ने पहला चुनाव जनसंघ से ही लड़ा था। 

प्रभात झा ने कहा कि अगर इतिहास में झांका जाए तो पता चल जाएगा कि सिंधिया भले अब विचारधारा को लेकर अलग हो गए होंं लेकिन उनके घराने की विचार धारा सबको मालूम है। राजामाता बीजेपी की संस्थापकों में से एक हैं। उनके पिता माधाराव सिंधिया ने खुद जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ा था। गुना लोकसभा क्षेत्र से 1957 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सिंधिया राजघराने की महारानी विजयाराजे ने पहला चुनाव लड़ा। 1971 में विजयाराजे के बेटे माधवराव सिंधिया ने भी पहला चुनाव यहीं से जनसंघ के टिकट पर लड़ा और जीता। ऐसे में कोई चौंकने वाली बात नहीं है अगर सिंधिया ने मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। हमारी पार्टी में जो आना चाहे उसका स्वागत है। बता दें कि प्रभात झा वो नेता हैं जो सिंधिया और सिंधिया परिवार पर सीधा प्रहार करते हैं, सिंधिया के धुर विरोधी नेता माने जाते हैं, ऐसे में उनके मुख से सिंधिया की तारीफ सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है|

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35A हटाए जाने के बाद से ही कांग्रेस में दो फाड़ होते नजर आ रहे हैं। एक के बाद एक कई बड़े कांग्रेस नेताओं ने इसके समर्थन में अपनी राय जाहिर की।राहुल गांधी के करीबी और कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ट्वीट कर मंगलवार (6 जुलाई) को अनुच्छेद 370 को हटाने का समर्थन किया था। वहीं, सिंधिया के इस ट्वीट के बाद से ही मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेताओं में असमंजस के हालात बन गए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को ट्वीट कर लिखा था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाए गए कदम और भारत देश मे उनके पूर्ण रूप से एकीकरण का मैं समर्थन करता हूं. संवैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाता तो बेहतर होता, साथ ही कोई प्रश्न भी खड़े नही होते. लेकिन ये फैसला राष्ट्र हित मे लिया गया है और मैं इसका समर्थन करता हूं।

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