दक्षिण के सियासी संकट का असर 'मध्य' को भी कर सकता है प्रभावित!

भोपाल। कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन सरकार को तगड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के १३ विधायकों के इस्तीफा देने की खबर आ रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि और भी विधायक इस्तीफा दे सकते हैं। दक्षिण की सियासत को भेदने के लिए बीजेपी लगातर कोशिश कर रही है। लोकसभा चुनाव से पहले ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक बयान दिया था कि दक्षिण के तीन राज्यों में भाजपा की सरकार आएगी। जिनमें केरल, तेलंगाना व आंध्र प्रदेश शामिल हैं.' हालाकि, इन तीनों में ही बीजेपी सरकार बनाने में नाकाम रही लेकिन कर्नाटक में उसकी कोशिश जारी है जो मंज़ील तक पहुंच सकती है। ऐसे हालातों में अब मध्य प्रदेश और राजस्थान की गठबंधन सरकार पर भी संकट गहराने की बाते सामने आ रही हैं। 

दरअसल, मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला है। पार्टी महज़ दो सीटों से बहुमत हासिल करने में पिछड़ गई थी। फिलहाल पार्टी निर्दलीय और सपा-बसपा के साथ मिलकर सरकार चला रही है।बीजेपी लगातार यह दावा करती रही है कि मध्य प्रदेश में भी जल्द बीजेपी की वापसी होगी। कांग्रेस इन सभी दावों को हवाहवाई बताती रही है। लोकसभा के नतीजों के अगले दिन ही नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने एक पत्र लिखकर सरकार से फ्लोर टेस्ट की बात कही थी। हालांकि, बाद में यह कहा गया कि ऐसा पार्टी की तरफ से नहीं किया गया है सिर्फ जरूरी कामों को ध्यान में लाने के लिए पत्र लिखा गया था। लेकिन बीजेपी नेता अलग अलग कार्यक्रम में यह दावा करते रहे हैं। 

कर्नाटक में अगर सरकार गिर जाती है और बीजेपी की सरकार वहा बनने में कामयाब होती है तो फिर ऐसे कयास लगाे जा रहे हैं कि एमपी और राजस्थान में भी सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल सकते हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को ही ये बात कही है कि कांग्रेस के कुछ विधायक हमारे संपर्क में हैं लेकिन हम तोड़फोड़ करके सरकार नहीं बनाएंगे। तोड़फोड़ करके सरकार बनानी है कि नहीं इस पर राष्ट्रीय नीति होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत है। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश में ऐसी परिस्थिति है की अगर फूंक मारी तो उनकी सरकार गिर जाएगी। ये सच है कि विधायक दल-बदलने को तैयार हैं।

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