महाकाल मंदिर के लिए बड़ा फैसला, काशी की तर्ज पर होगा विकास

भोपाल। उज्जैन में महाकालेश्वर मन्दिर क्षेत्र का विकास बनारस के काशी विश्वनाथ मन्दिर के विकास की तर्ज पर किया जाएगा। अगले कुछ महीनों में रूद्र सागर में मिलने वाले गंदे पानी को रोक दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कमल नाथ के निर्देश पर मंत्री समूह की बैठक में यह फैसला लिया है। उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि स्थानीय जन-प्रतिनिधियों और पुजारियों की सहमति से योजना क्रियान्वित की जाएगी। योजना कागजों पर नहीं बनेगी। उज्जैन नगर एवं महाकालेश्वर मंदिर का पौराणिक स्वरूप कायम रखा जाएगा। पुराणों में वर्णित इतिहास के मुताबिक ही विकास किया जाएगा।

महाकालेश्वर के लिये नया एक्ट

मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर का नया एक्ट तैयार किया जा रहा है। पुराने एक्ट में आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं। एक्ट में नियम बनाने के अधिकार सरकार के पास होंगे। मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था को भी ठीक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उज्जैन शहर के पौराणिक इतिहास और समृद्ध संस्कृति को ध्यान में रखकर उज्जैन का विकास करेंगे। 

दूर होंगी शिखर दर्शन की बाधाएँ

मंत्री जयवद्र्धन सिंह ने कहा कि भगवान महाकालेश्वर के शिखर दर्शन की बाधाओं को दूर करेंगे। आसपास के भवनों की ऊँचाई शिखर से कम होगी। इसके लिए निर्देश जारी किए जाएंगे। आगामी सितम्बर-अक्टूबर माह में जन-प्रतिनिधियों को काशी विश्वनाथ मन्दिर, तिरूपति मन्दिर एवं सोमनाथ मन्दिर की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के लिए भेजा जाएगा।

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