Raksha Bandhan Special: इस मुहूर्त में बंधेंगी राखियां, 19 साल बाद बन रहा ऐसा महासंयोग

धर्म डेस्क।

लंबे समय बाद रक्षाबंधन पर एक साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं। पहला इस बार सावन माह में 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन एक साथ है। दूसरा इस बार भद्रा का साया नहीं होने से दिनभर राखी बांधने के लिए मुर्हूत रहेगा। तीसरा रक्षाबंधन से ठीक चार दिन पहले गुरु मार्गी होकर सीधी चाल शुरु हो गई है। वही रक्षाबंधन पर श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, बव करण के साथ सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा मकर राशि में होने से रक्षाबंधन को बेहद खास बना रहे हैं। इसी दिन योगी अरविंद जयंती, मदर टेरेसा जयंती और संस्कृत दिवस भी मनाया जाएगा।

दरअसल, इस बार बहनों को भाई की कलाई पर प्यार की डोर बांधने के लिए मुहूर्त का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस बार राखी बांधने के लिए काफी लंबा मुहूर्त मिलेगा। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं है। इसलिए पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा। हालांकि कुछ खास मुहुर्त है जैसे अच्छी चौघड़िया सुबह 05 बजकर 50 मिनट से सुबह 07 बजकर 28 मिनट तक है यानि ये राखी बांधने का अच्छा मुहूर्त है। इसके बाद सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 02 बजकर 02 मिनट तक चार चौघड़िया रहेगी यानि इस अवधि के दौरान राखी बांधी जा सकती है। ये अच्छा मुहूर्त है। इसके बाद कल शाम 05 बजकर 21 मिनट से शाम 07 बजे तक का मुहूर्त भी राखी बांधने के लिए शुभ है। शाम 07 बजे से लेकर रात 9 बजकर 45 मिनट तक का समय शुभ है। इस समय बहनें भाई की कलाई पर राखी बांध सकती है।दोपहर 02 बजकर 02 मिनट से 03 बजकर 43 मिनट तक अमृत की चौघड़िया भी है जिसमें राखी बांधना तो शुभ होता है लेकिन इसी दौरान राहुकाल रहेगा। लिहाज़ा ध्यान रहे कि आप इस समय भाई को राखी ना बांधे।

19  साल बाद ऐसा संयोग

इस बार 19 साल बाद रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस एक साथ मनाया जाएगा। इसके पूर्व वर्ष 2000 में राखी 15 अगस्त को पड़ी थी। इसके बाद वर्ष 2084 में मंगलवार को दोनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे। गुरुवार को पड़ने वाला त्योहार श्रवणा नक्षत्र में मनाया जाएगा।  चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र का संयोग बहुत ख़ास रहेगा। सुबह से ही सिद्धि योग बनेगा जिसके चलते पर्व की महत्ता और अधिक बढ़ेगी। कई ऐसे संयोग बनेंगे, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार गुरु बृहस्पति ने देवराज इंद्र को दानवों पर विजय प्राप्ति के लिए इंद्र की पत्नी से रक्षासूत्र  बांधने के लिए कहा था जिसके बाद इंद्र ने विजय प्राप्ति की थी। राखी का त्योहार गुरुवार के दिन आने से इसलिए इसका महत्व काफी बढ़ गया है।

रक्षाबंधन के दिन लगेगा पंचक

ज्योतिष के अनुसार पंचक में पांच नक्षत्र का योग होता है। जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के चारों ओर भ्रमण करता है तो पंचक लगता है। इस काल को अशुभ माना जाता है। इसलिए माना जाता है कि पंचक के समय में यदि कोई अशुभ कार्य हो जाए तो वह 5 बार पुनः होता है। इस बार पंचक रक्षाबंधन के दिन है। हालांकि जब पंचक गुरुवार के दिन या बुधवार के दिन शुरू होता है तो उसे अशुभ नहीं माना जाता है। इसलिए रक्षा बंधन के लिए पंचक कोई बाधा नहीं रहेगा।

राखी बांधते समय ये मंत्र जरुर बोले

येन बद्धो बलिराज, दानवेंद्रो महाबलः। 

तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे, माचल-माचलः।।

अर्थात- राजा बलि ने रक्षा सूत्र से ध्यान भटकाए बिना अपना सब कुछ त्याग दिया था। ठीक वैसे ही मैं अपने भाई की कलाई पर ये रक्षा सूत्र बांध रही हूं, तुम अपने लक्ष्य से विचलित न होना और हर हाल में मेरे भाई की रक्षा करना।

राखी बांधने की सही तरीका

श्रावण पूर्णिमा के दिन यानी रक्षाबंधन को प्रातः काल बहनों को विधिपूर्वक स्नान करना चाहिए। फिर स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद एक पीले वस्त्र में सूत्र व पीली सरसों, केसर, चंदन, अक्षत, सोने का तार का टुकड़ा एवं दूर्वा बांध दें। फिर इसे एक कलश में रखकर रक्षा सूत्र का पूजन करें।रक्षा सूत्र पूजन के पश्चात एक थाल में रोली, चंदन, अक्षत्, दही, रक्षा सूत्र और मिठाई रख लें। साथ में घी का एक दीपक भी रखें। वहीं भाई भी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।अब बहन मुहूर्त के अनुसार, भाई को पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके बैठा दें। फिर सबसे पहले भाई को तिलक करें और दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें। फिर दीपक प्रज्वलित करके आरती करें। अंत में मिठाई खिलाकर भाई की मंगल कामना करें।

राखी से जुड़ी दो रोचक कहानियां

 राखी के साथ एक और प्रसिद्ध कहानी जुड़ी हुई है। कहते हैं, मेवाड़ की रानी कर्मावती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली। रानी लड़ने में असमर्थ थी अत: उसने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमायूं ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुंच कर बहादुरशाह के विरुद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती व उसके राज्य की रक्षा की।वही सिकंदर को युद्ध के दौरान जीवनदान भी इस राखी के चलते ही मिला था। कहते है सिकंदर की पत्नी ने पुरुवास उर्फ राजा पोरस को राखी बांधकर भाई बना लिया था और वचन लिया कि वो उनके पति की रक्षा करेंगे। इसके बाद राजा पोरस ने युद्ध के दौरान सिकंदर को जीवन दान दे दिया।

सावन पूर्णिमा के दिन क्यों मनाते हैं राखी 

सावन मास की पूर्णिमा पर मनाये जाने वाले त्‍योहार रक्षाबंधन को प्राचीन समय में सावनी उत्‍सव के रूप में मनाया जाता था। धीरे-धीरे वक्‍त बदला और इसका स्‍वरूप भी परिवर्तित हुआ।  इस बारे में वैदिक काल से लेकर महाभारत काल और अन्‍य कालों में कई प्रसंग मिलते हैं। कहा जाता है कि वैदिक काल से ही ब्राह्मणों ने रक्षाबंधन की यह परंपरा शुरू की। वह सावन मास की पूर्णिमा के दिन अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधकर ईश्‍वर से उनकी दीर्घआयु और सुख-संपन्‍नता से परिपूर्ण होने की प्रार्थना करते थे। इसके बाद पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा का विस्‍तार हुआ और सावन मास की पूर्णिमा के ही दिन बहनें अपने भाईयों को रक्षा सूत्र बांधने लगीं। 

राखी पर सबसे चर्चित हिन्दी फिल्मी गाना


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