मीसाबंदियों का सम्मान, शिवराज बोले-इतिहास गलत लिखा गया, सिर्फ नेहरू-गांधी ने आजादी नहीं दिलाई

भोपाल।

प्रदेश में मीसाबंदियों को लेकर जमकर सियासत गर्माई हुई है। पेंशन के बाद अब सम्मान को लेकर बीजेपी -कांग्रेस आमने-सामने हो गए है।इसी कड़ी में आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सरकार द्वारा मीसाबंदियों का सम्मान ना करने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने बीजेपी कार्यालय में उनका सम्मान कर सरकार का विरोध किया और कहा इतिहास गलत लिखा गया है, सिर्फ नेहरु गांधी ने ही आजादी नही दिलाई। इस मौके पर बीजेपी के कई बड़े नेता मौके पर मौजूद रहे ।

      इस मौके पर शिवराज ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इंदिरा जी का चुनाव निरस्त और अवैध घोषित किया गया था, हाईकोर्ट का फैसला था। नारे लग रहे थे कि कुर्सी खाली करो कि जनता आती है। तब अपनी कुर्सी और सरकार बचाने के लिए आपातकाल लगाया था। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय है। सारे नेताओं, कार्यकर्ताओं को जेलों में ढूंस दिया गया। अमानुषिक यातनाएं दी गईं। मेरे जैसे युवा कार्यकर्ता जो उस समय 11वीं में था, से देश की सुरक्षा को खतरा है, कहकर जेल में रखा गया। आज हम लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित कर मध्यप्रदेश सरकार का विरोध कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के प्रत्येक ज़िले में इन सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा।

इतिहास सही नही लिखा गया

शिवराज ने कहा कि एक बात की पीड़ा ज़रूर होती है कि आज़ादी का इतिहास सही नहीं लिखा गया। केवल ये कहा गया कि देश को आज़ादी महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने दिलाई। जब देश आजाद हुआ तो केवल एक परिवार को महिमा मंडित किया गया। हम भूल गए भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, वीर सावरकर महारानी लक्ष्मीबाई को, लाला हरदयाल, रासबिहारी बोस, दुर्गा भाभी को। हम देश के सभी वीर शहीदों को प्रणाम करते हैं।

कश्मीर खुली हवा में ले रहा सांस

आज अद्भुत स्वतंत्रतादिवस है। रिमझिम कर जैसे आनंद की वर्षा हो रही है। कश्मीर भी आज धारा 370 से मुक्त होकर खुली हवा में सांस ले रहा है।पाकिस्तान, दुनिया और कांग्रेस भी जान ले कि मुद्दा धारा 370 नहीं है। मुद्दा पाक अधिकृत कश्मीर है, जो भारत का अभिन्न अंग है। अब बात केवल पाक अधिकृत कश्मीर पर होगी।

बता दे कि प्रदेश की तत्कालीन शिवराज सरकार द्वारा राष्ट्रीय पर्वों पर आयोजित समारोहों में मीसाबंदियों को विशेषतौर पर आमंत्रित कर सम्मानित करने की व्यवस्था को कांग्रेस सरकार ने बदल दिया है। कमलनाथ सरकार ने मीसाबंदियों को आमंत्रित करने का क्लाज हटा दिया है और कलेक्टरों को भी आदेश जारी कर दिया है।इसी के चलते आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किसी भी मीसाबंदी का सम्मान नही किया गया ।सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला मौका है जब मीसाबंदियों को सम्मानित नही किया गया।इसको लेकर बीजेपी और मीसाबंदियों में आक्रोश व्याप्त है।


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