5 महिने से नही मिली पेंशन, मीसाबंदियों में पनपने लगा है आक्रोश

भोपाल।

सत्ता में आते प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने मीसाबंदियों की पेंशन पर रोक लगा दी थी।इसको लेकर खूब बवाल भी मचा था, हालांकि बाद में सरकार ने यू-टर्न लिया और जांच के बाद फिर से इसे शुरु करने की बात कही थी। लेकिन आज पांच महिने से ज्यादा बीत चुके है, लेकिन अबतक मीसाबंदियों को पेंशन नही मिल पाई है। सरकार की इस लेट लतीफी के चलते  लोकतंत्र सेनानी संघ (मीसाबंदियों) में आक्रोश पनपने लगा है। अब मीसाबंदियों को पेंशन का इंतजार है।

दरअसल, सत्ता में आते ही सरकार ने फिजूलखर्ची बताते हुए पेंशन पर रोक लगा दी थी। जिसको लेकर खूब विवाद हुआ था, विपक्ष के साथ साथ मीसाबंदियों ने भी सरकार का जमकर घेराव किया था।हालांकि बाद में सरकार ने यू-टर्न ले लिया था और यह तर्क दिया था कि मीसा बंदी पेंशन योजना के तहत कई अपात्र लोगों को भी पेंशन मिल रही है, इसलिए पहले इसकी जांच होगी और उसके बाद ही योजना को लेकर फैसला लिया जाएगा। तब तक ये योजना बंद रहेगी।लेकिन सत्यापन के नाम पर पेंशन पांच महीने से बंद है।हालांकि18 जिलों में सत्यापन के बाद पेंशन शुरू कर दी गई लेकिन 34 जिलों के मीसाबंदियों को अब भी पेंशन का इंतजार है। इनमें भोपाल, होशंगाबाद, सीहोर, हरदा, सिवनी और बालाघाट आदि शामिल हैं।

लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक का कहना है कि प्रदेश के 34 जिलों में मीसाबंदियों की पेंशन कलेक्टर की उदासीनता के चलते बंद पड़ी हुई है।  उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, रीवा, सीधी और शहडोल सहित 18 जिलों में सत्यापन हो चुका है। इन जिलों में एरियर्स के साथ पेंशन मिल गई है, लेकिन अब भी 34  जिलों में पेंशन नही मिली है।सरकार को इसे जल्द से जल्द शुरु करना चाहिए।

इन जिलों में मीसाबंदियों को पेंशन का इंतजार

भोपाल, जबलपुर, सीहोर, ग्वालियर, होशंगाबाद, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, मंडला, बालाघाट और सिवनी समेत 34  जिले। 

मीसाबंदी पेंशन योजना

आपको बता दें कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में आपातकाल के दौरान जेल में डाले गए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी व स्वयंसेवकों के लिए ये योजना शुरू की गई थी। मीसाबंदी पेंशन योजना के तहत 2000 से ज्यादा लोगों को 25 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाती है। शिवराज सरकार ने साल 2008 में ये योजना शुरू की। 2008 में 3000 रुपये से शुरू होकर धीरे-धीरे 2017 में ये राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई।प्रदेश में करीब ढाई हजार मीसाबंदी हैं, इनमें से कुल 2300 को पेंशन मिल रही है जिसमें 800 महिलाएं शामिल हैं। कुछ ऐसे भी हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। देश में 25 जून 1975 में आपातकाल लगाया था।


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