सीएम के रोल मे शिवराज

भोपाल।

सियासी अखाड़ा बने मंदसौर में बाढ़ से बिगड़े हालतों के बाद जमकर सियासत हो रही है।सत्तापक्ष-विपक्ष द्वारा एक दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे है।इन सब के बीच विपक्ष मे होने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज मंदसौर में डेरा जमाए बैठे है और सरकार की जमकर घेराबंदी कर रहे है। किसानों की हक की लड़ाई लड़ते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने शनिवार को कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया और जनता अदालत लगाई। इस दौरान शिवराज ने पीडित किसानों की जनसुनवाई की।भारी संख्या में बाढ़ पीड़ित अपनी समस्या लेकर शिवराज की अदालत में पहुंचा और न्याय की गुहार लगाई। खास बात ये रही कि इस धरने का असर हुआ और कलेक्टर ने खुद मंच पर आकर शिवराज की सभी मांगे मानी और बीजेपी का आभार भी माना। शिवराज ने चौबीस घंटे के अपने धरने से साबित कर दिया कि वे भले ही सत्ता में नही है लेकिन जनता के हक की लड़ाई वे सड़कों पर उतरकर लड़ेंगें। ऐसा करके एक बार फिर वो सीएम ना होकर भी सीएम के रोल में जनता के बीच नजर आए।

इस दौरान शिवराज ने सरकार पर भी जमकर हमला बोला। शिवराज ने कहा कि प्रशासन ने धारा 144 लगाई है, अब वो चाहे तो 288 भी लगा दे, पर बाढ़ पीड़ितों की लड़ाई पूरी लड़ूंगा। हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं है। मैं तो बाढ़ पीड़ितों की मदद चाहता हूं। अगर मैं मुख्यमंत्री होता तो खाते में पैसा आ गया होता, सामान पहुंच गया होता। सरकार सो रही है। मैं जनता की लड़ाई लड़ता रहूंगा। कोई गाली दे इसकी मुझे फिक्र नहीं है।शिवराज ने मांग की किसान अब कर्ज़ वापस करने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए सरकार तत्काल कर्ज़माफी करे। बाढ़ग्रस्त इलाकों के नुकसान का तुरंत आँकलन हो और लोगों को मुआवज़ा मिले।

शिवराज ने कहा कि  जनता अपनी तकलीफ बताए कि गांवों में कैसी तबाही हुई है। सरकार से कहेंगे कि जनता की सारी तकलीफें दूर करो। नहीं सुनेगी तो चैन की सांस नहीं लेने देंगे। धरना इसलिए किया कि सरकार जाग जाए।अन्याय पूर्ण मिल रही बिजली के खिलाफ हम सविनय अवज्ञा आंदोलन करेंगें।बिजली के बिल नही भरेंगें उनकी होली जलाएंगें।

शिवराज यही नही रुके उन्होने आगे कहा कि कांग्रेस के मेरे मित्र भोपाल में बैठे-बैठे मेरा मज़ाक उड़ा रहे हैं कि शिवराज बाढ़ पीड़ितों व किसानों के बीच जाकर नाटक कर रहा है। कांग्रेसियों, तुम क्या जानों दुःख और दर्द। मैं माताओं, बहनों, किसानों को न्याय मिलने तक लड़ूँगा। शत-प्रतिशत फसलें बर्बाद हो गई हैं। सरकार कह रही है कि सर्वे करायेंगे। सर्वे तो तब होता है, जब 25-50% फसल बर्बाद हो, यह तो 100% बर्बाद हो गई। इसलिए जनता की यह अदालत माँग करती है कि ₹40000 प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दे दो ।

इस दौरान मंदसौर कलेक्टर ने मंच पर आकर शिवराज की मांगो को पूरा करने की घोषणा की।कलेक्टर ने कहा कि बच्चों की बाढ़ में बह गई और खराब हो गई पुस्तकों का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा रहा है , जल्द ही बच्चो को नई पुस्तके मिलेगी। जो भी मांगे है उन्हें सीएम के सामने रखेंगें।इस दौरान भाजपा का आभार मानते हुए कलेक्टर ने कहा कि बीजेपी के जनप्रतिनिधियों और जनता का राहत कार्य में पूरा सहयोग मिल रहा है हम जल्द ही इस आपदा से निपटेंगें।



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