लोकसभा चुनाव से चर्चा में आए IAS अधिकारी ने छोड़ी नौकरी, बोले-दबाई जा रही थी आवाज

सूरत।

2012 बैच के एक आईएएस अधिकारी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। वे इन दिनों पावर एंड नॉन कन्वेंशनल ऑफ एनर्जी के सेक्रेट्री पद पर कार्यरत थे। जिलाधिकारी बनने से पहले  उन्होंने बतौर प्राइवेट इंजीनियर काम किया है। साल 2012 में उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा में 59वीं रैंक हासिल की थी। हालांकि इस्तीफे की वजह सामने नही आई है, लेकिन एक न्यूज चैनल को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि हम जैसे कई लोग इस पेशे में आते हैं ताकि हम जिसकी सेवा कर रहे हैं उनकी आवाज बन सकें। मुझे जब एहसास हुआ कि मेरा आवाज दबाई जा रही है या दबाने की कोशिश की जा रही है तो मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया।

दरअसल, संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली में तैनात 2012 बैच के आईएएस अधिकारी गोपीनाथ कन्नन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। केरल के रहने वाले कन्नन इन दिनों केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली में तैनात थे। वे इन दिनों पावर एंड नॉन कन्वेंशनल ऑफ एनर्जी के सेक्रेट्री पद पर कार्यरत थे। वे कश्मीर कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी शाह फैसल के बाद सबसे कम उम्र में अपनी सर्विस से इस्तीफा देने वाले दूसरे आईएएस अधिकारी बन गए हैं।

चर्चा है कि वह मौजूदा प्रशासनिक कार्यशैली से नाखुश थे। हालांकि उन्होंने अपने त्यागपत्र में इसे लेकर कुछ लिखा नहीं है। 2012 सिविल सेवा परीक्षा में कन्नन ने 59वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की थी। आईएएस बनने से पहले वह एक निजी कंपनी में डिजाइन इंजीनियर थे।  उन्होंने कहा कि वह सिविल सेवा में इस उम्मीद से शामिल हुए थे कि वह उन लोगों की आवाज बन सकेंगे जिन्हें खामोश कर दिया गया लेकिन यहां, वह खुद की आवाज गंवा बैठे। उन्होंने कहा कि वह अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वापस चाहते हैं। वह अपनी तरह से जीना चाहते हैं, भले ही वह एक दिन के लिए ही हो। 

कन्नन पहचान छिपाकर दिन-रात बाढ़ पीड़ितों की थी मदद

पिछले साल केरल में आई भीषण बाढ़ के दौरान गोपीनाथ चर्चा में आए थे। तब उन्होंने अपनी पहचान छुपाकर आठ दिनों तक केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद की थी। गोपीनाथ 26 अगस्त को केरल मुख्यमंत्री राहत कोष में देने के लिए दादरा नगर हवेली की ओर से एक करोड़ रुपए का चेक देने केरल पहुंचे थे। लेकिन चेक सौंपने के बाद वापस लौटने की बजाय कन्नन ने वहीं रुककर अपने लोगों की मदद करने का फैसला किया। यहां वह अलग-अलग राहत शिविरों में सेवा देते रहे। इस दौरान उन्होंने किसी को जाहिर नहीं होने दिया कि वह दादरा नगर हवेली के जिला कलेक्टर हैं। उन्होंने राहत सामग्री अपने कंधे पर रखकर लोगों तक पहुंचाई थी। इस दौरान उनकी खूब प्रशंसा हुई थी। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें असली हीरो कहने लगे थे।

चुनाव के दौरान भी चर्चा में रहे

गोपीनाथ पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग से अपने से बड़े अधिकारियों की शिकायत की थी कि उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद उनको कलेक्टर पद से हटाकर दूसरे विभाग की जिम्मेदारी दे दी थी। 


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