आंखफोड़वा कांड: जांच के आदेश, CM बोले- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो

भोपाल| मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए आंखफोड़वा कांड के बाद सरकार सख्त हो गई है| इंदौर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 11 मरीजों की आंखों की रोशनी चली जाने के मामले में जांच के आदेश दिए जा चुके हैं| इसके अलावा अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही ओटी को सील करवा दिया है| वहीं मामले में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घटना को दुखद बताते हुए प्रभावित मरीज़ को 50-50 हज़ार की सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं| उन्होंने 9 वर्ष पूर्व इसी हॉस्पिटल में हुई घटना के बाद भी कैसे हॉस्पिटल को वापस अनुमति प्रदान की गयी इस पर सवाल उठाये हैं| 

इंदौर से सामने आये इस मामले में मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया है| उन्होंने लिखा "इंदौर के आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 11 मरीज़ों की आँखो की रोशनी धूमिल होने की घटना बेहद दुखद,कलेक्टर को जाँच के निर्देश"। "9 वर्ष पूर्व इसी हॉस्पिटल में हुई घटना के बाद भी कैसे हॉस्पिटल को वापस अनुमति प्रदान की गयी,जाँच कर प्रबंधन व दोषियों पर कड़ी कार्यवाही हो, सभी मरीज़ों को अन्य अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से लेकर पीड़ित मरीज़ों की हरसंभव मदद करने के निर्देश। इन सभी मरीज़ों के उपचार का ख़र्च शासन द्वारा वाहन करने के साथ ही ,प्रत्येक प्रभावित मरीज़ को 50-50 हज़ार की सहायता प्रदान करने के निर्देश"।

बता दें कि मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई। वहीं रेडक्राॅस से 20 हजार रुपए की मदद के साथ ही सभी पीड़ितों का इलाज सरकार करवाएगी, जिसके लिए उन्हें चोइथराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मुख्यमंत्री ने मामले में संज्ञान लेते हुए पीड़ितों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है। स्वस्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने दोषियों को कड़ी सजा दिलवाने का कहते हुए जांच के लिए सात सदस्यीय कमेटी गठित की है। वहीं मंत्री जीतू पटवारी ने अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही ऑपरेशन थिएटर को भी सील करवा दिया है। मंत्री ने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की बात कही है।


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