वन विभाग में अब 'सियाज कार' का मामला गर्माया

भोपाल। रामेश्वर धाकड़| वन मंत्री उमंग सिंघार की कार्यप्रणाली को लेकर महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मंत्री द्वारा अपर मुख्य सचिव से लेकर मंत्रालय के अन्य अफसरों के बीच कार्य आवंटन का मामला अभी सुर्खियों में है। इस बीच मंत्री द्वारा मंत्रालय के  उप सचिव (सलाहकार) स्तर के अधिकारी को सियाज कार आवंटित करने संबंधी नोटशील लिखने के बाद आईएएफ अफसरों का बड़ा गुट मंत्री के इस फैसले के खिलाफ हो गया है। 

खबर है कि वन विभाग के आला अधिकारियों ने विभाग के प्रभारी अपर मुख्य सचिव केके सिंह के सामने यह आपत्ति दर्ज कराई कि मंत्री ने जिस अधिकारी को सियाज गाड़ी आवंटित करने की नोटशीट लिखी है, उस अधिकारी से वरिष्ठ 52 अधिकारी ऐसे हैं जो वन मुख्यालय में पदस्थ है। उनका ग्रेड पे भी ज्यादा है। फिलहाल अपर मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव के अवकाश से लौटने तक यह मामला शांत है।  वन मुख्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि वन मंत्री उमंग सिंघार ने पिछले हफ्ते नोटशीट लिखकर सियाज गाड़ी को वन मंत्रालय में पदस्थ उपसचिव (सलाहकार वित्त)रंजीत सिंह चौहान के लिए आवंटित कर दिया। जब यह मामला वन मुख्यालय तक पहुंचा तो आईएफएस अधिकारी नाराज हो गए। मुख्यालय की समन्वय शाखा के एक आला अधिकारी इस मसले पर चर्चा के लिए प्रभारी अपर मुख्य सचिव के पास पहुंचे और आपत्ति दर्ज कराई। जिसमें तर्क दिया कि सामान्य प्रशासन विभाग के नियमानुसार अधिकारियों केा गाड़ी का आवंटन उनकी गे्रड पे और वरिष्ठता के आधार पर होता है। मंत्री ने जिस अफसर को सियाज गाड़ी का आवंटन किया है, उस अधिकारी को इंडिगो की पात्रता है,जबकि विभाग ने उसे शिफ्ट डिजायर गाड़ी दे रखी है। गाड़ी के आवंटन केा लेकर वन मंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अफसरों ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है। 


प्रमुख सचिव को मिलती है सियाज

मंत्रालय में प्रमुख सचिव  एवं अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों को सियाज या उसके समान कीमत वाली गाडिय़ों की पात्रता है। ज्यादातर प्रमुख सचिवों के पास सियाज गाड़ी का आवंटन है। 


ठंडा पड़ा जांच का मामला

वन मंत्री उमंग सिंघार ने पिछले हफ्ते शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुए पौधरोपण घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने का ऐलान किया था। इसके लिए मंत्री ने बाकायदा नोटशीट भी लिखी। नोटशीट में तारीख गलत होने पर मंत्री की किरकिरी हुई। इस बीच अफसरों के कार्य आवंटन एवं अपर मुख्य सचिव के लंबी छुट्टी पर जाने की वजह से जांच का मामला फिलहाल ठंडा पड़ गया है। अभी तक ईओडब्ल्यू एवं जीएडी घोटाले की जांच से जुड़ा मंत्री का कोई पत्र नहीं मिला है। 

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